बुधवार, 10 फ़रवरी 2010

लोकगीतों के पन्ने

मैंने अपने ब्लॉग में बताया था की मै अपनी मम्मी की डायरी ले के आया हूँ उसमे मिथिलांचल में होने वाले हर आयोजन सम्बन्धी गीत है यानी संस्कार गीत . पिछले दिनों मैंने उसमे से भगवती गीत ब्लॉग पर प्रकाशित किया था ,उसी कड़ी में इस बार मै सोहर पोस्ट कर रहा हूँ. सोहर वैसे गीत होते है जो संतान जनम के समय या उसके बाद गाये जाते हैं. तो पेश है श्रीमती रीता मिश्र की डायरी के कुछ भाग. ये कड़ी आगे भी जारी रहेगी .
सोहर
पहलि पहर राती बितल सब लोग सुतल रे देवकी चलली नहाय कि दस सखी संग लागु रे
कियो सखी हाथ पैड माजथि कियो गगरी भरु रे
कियो ठार कदम तर नैना स नीर भरु रे
यशोमति हाथ पैर माजथि कौशल्या गगरी भरु रे देवकी ठाढ कदम तर नैना स नीर भरु रे
किये तोरा कन्त तुरन्त कयल किये दैव दुरि कयल रे
किये तोरे ठाढ कदम तर नैना स नीर बहु रे
सात पुत्र दैए देलनि कंस हरि लेलनि
आठम रहियऊ गर्भ स उनको नहिं भरोस थीक रे
चुप चुप रहु बहिन सहोदर अपन बालक हम भेजब आहांक जोइयायेब रे
2.
पान स धानि पातरि कुसुम सन सुन्दर रे
रतन सिंहासन पर बैसल दर्द व्याकुल रे
काहां गेली किये भेली नन्दी नन्दी दुलरइतीन
आनि दिय भईया बजाय दर्द व्याकुल रे
जुअवा खेलईत आहां भईया स विनती करू हे
भईया आहां धनि दर्द व्याकुल आहिं के बजावथि हे
एक देलनि एहरि पर दोसर देहरि पर रे
तेसरे में बैसल पलंग पर कहु धनि कुशल हे
एक कुशल पिया मन पारु ओ दिन मन पारु रे
बाबा देल पलंगिया ओही पर फ़ुसलाओल रे
एक कुशल धनि मन पारु रे
सेर सेर लड्डुआ खुआएलहु कियो नहिं जानल रे
आई धनि दर्द व्याकुल सब कियो जानल रे
3.
गाछ सुतल तोहे सुगना कि तोहु सीताराम कहु रे ललना रे
काहां रंगले दुनु होठ रतन सन सुन्दर रे
बाबा घर बाजन बाजे भईया घर बेटा भेल रे ललना रे ओतहीं रंगैलऊं दुनु होठ रतन सन सुन्दर रे
भोर भिनसाऎ भेल होरीला जनम लेले, बाजय लागल बधाई धरती आनन्द भेल रे
सास उठलि मंगल गावईत उठली नन्दी नचैत उठली रे ललना रे गोतनी उठली जरईत कि कंस जनम लेल रे
सुरदास सोहर गावोल गावि सुनावोल रे ललना रे तीन कहु बास बैकुण्ठ कि पुत्र फ़ल पाओल रे
4.
सुन्दरि चलली गंगादह रे आओर यमुना दह रे ललना रे गंगा अहुंके अरजिया गंगा डुबी मरब हे
किये तोरा आहे सुन्दरी सासु दुख किये नन्दी किये दुख रे ललना किये तोरा परदेश गंगा डुबी मरब रे
जानी कानु जनि खिजु सुन्दरि जनि नैना नीर ढारु रे
नहिं मोरा आहे गंगा सासु दुःख नहिं नन्दी दुःख रे नहिं मोरा पिया परदेश बालक दुःख डुबी मरु रे
जनि कानु जनि खिजु सुन्दरी जनि नैना नोर ढारु रे ललना रे गंगाजी होयती सहाय कि पुत्र फ़ल पाओल रे
5.
किये मोरा कागा रे बाब आओता किये मोरा भईया आओता रे कागवा कौने सगुन तोहे आयल कि बोलिया सोहावन रे
नये तोरा आहे धनि बाबा आओत नहिं धनि भैया आओत हे धनि होरिला सगुन ले अयलयुं बोलिया सोहावन रे
जौ मोरा आहे कागवा बाबा आओत आओर भईया आओत रे ललना तोहरो काटवा दुनु ठोर कि बोलिया सोहावन रे
जौ मोरा आहे आगा पिया आओता होरिला जनम लेत रे कागा सोना मॆढायब दुनु ठोर बोलिया सोहावन रे

1 टिप्पणी:

Unknown ने कहा…

I think it is a great work because the person who have some root in Mithilanchal can come closer to it.
They can easily access it globally .
I am not appreciating u because this thankful work which u have done related to my Mom but this can inspires others to bring Mithil culture for every people.