सोमवार, 14 जुलाई 2008

नींद आने तक

तुम सो जाओ
पर ख्वाब हमारे लेकर
और मैं
खोजूंगा
अंधेरे में तुम्हे
नींद के आ जाने तक

3 टिप्‍पणियां:

परमजीत बाली ने कहा…

बहुत बढिया!!

abhinesh ने कहा…

bahut khub

Avanish ने कहा…

what a beautiful poem.It is all about devotion for whom , he is still searching for share his dreams not only in sleeping mode but in days also.................................