रविवार, 26 जून 2011

हिन्दी सिनेमा में बदलता नैरेशन

सिनेमा एक कला भी है ये मान्य तथ्य है. हर कला संप्रेषण के नये अंदाज विकसित करती है. एक नैरेटिव के रूप में ढलती हुई वह बदलती है और इसी से उसका विकास होता. हिन्दी सिनेमा में नैरेशन यानी आख्यान को गढ़ने का क्या तरीका रहा है. नैरेशन क्या है? सिनेमाई नैरेशन क्या होता है. इसी की पड़ताल करता यह शोधपूर्ण आलेख.पढने के लिये लिंक पे चटका लगायें.


‘नैरेशन’ (Narration)  यानि कथा कहने की कला, ‘नैरेटिव’ (Narrative)  यानि लिखे, कहे या दिखाये गये घटनाओं का विवरणात्मक संग्रह।[i] नैरेशन को किस्सागोई या भी कहा जा सकता है यह कथात्मक और गैर कथात्मक दोनों हो सकती है। नैरेटिव के लिये हम वृतांत शब्द का प्रयोग करते हैं। नैरेशन और नैरेटिव कई रूपों में प्रचलित है। मूलतः‍ यह संप्रेषण का तरीका है। इसका संचार कुछ ऐसे होता है।                                                                        


[i]  ओक्स्फ़ोर्ड डिक्शनरी के अनुसार
http://www.mediafire.com/?e6ahm2j272zcqci

3 टिप्‍पणियां:

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

नैरेशन यानी आख्यान को गढ़ने की कला पर शोधपूर्ण आलेख.....मन को छूने में कामयाब है| बधाई और शुभकामनाएं |

amitesh ने कहा…

shukriya...

अरूण साथी ने कहा…

sundar